UPSC करंट अफेयर्स
UPSC PIB News & Current Affairs Analysis — 23 October 2026
Agri-Voltaics: खेती और सौर ऊर्जा का एकीकरण
30 second में समझें
एक नज़र में (30-Second Summary)
- क्या: Agri-Voltaics या AgriPV में एक ही भूमि पर कृषि उत्पादन और सौर बिजली उत्पादन किया जाता है।
- क्यों चर्चा में: नई दिल्ली में 21–23 अक्टूबर 2026 को 7वाँ Agrivoltaics World Conference आयोजित हुआ, जिसकी थीम Powering the Global South थी।
- भारत की स्थिति: अगस्त 2025 तक 36 परिचालित परियोजनाएँ, कुल 37.54 MW क्षमता और 10 विकासाधीन पायलट परियोजनाएँ।
- संभावना: PIB Backgrounder के अनुसार भारत की अनुमानित AgriPV क्षमता लगभग 3,000 GW से 14,000 GW तक हो सकती है।
- महत्व: भूमि का दोहरा उपयोग, किसानों की अतिरिक्त आय, जल संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा।
स्रोत: PIB Backgrounder, Release ID 2327125, पृष्ठ 1–6।
1. चर्चा में क्यों?
23 अक्टूबर 2026 को PIB ने Agri-Voltaics: Powering India's Farms, Growing a Sustainable Future शीर्षक से एक विस्तृत Backgrounder प्रकाशित किया।
इसमें भारत में कृषि और सौर ऊर्जा को एकीकृत करने की संभावनाओं, परियोजनाओं, सरकारी पहलों और किसानों की आय पर संभावित प्रभावों को रेखांकित किया गया है।
यह विषय UPSC के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कृषि उत्पादकता, भूमि उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु अनुकूलन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था एक साथ जुड़े हैं।
2. Agri-Voltaics क्या है?
Agri-Voltaics ऐसी व्यवस्था है जिसमें सौर पैनलों को खेतों में फसलों के ऊपर या कतारों के बीच स्थापित किया जाता है, ताकि उसी भूमि पर खेती और बिजली उत्पादन दोनों संभव हों।
इसके तीन प्रमुख तकनीकी तत्व हैं:
- Elevated Solar Structures: पैनलों को पर्याप्त ऊँचाई पर लगाया जाता है ताकि नीचे फसलें उग सकें और कृषि उपकरणों की आवाजाही बनी रहे।
- Partial Shading: उपयुक्त परिस्थितियों में आंशिक छाया फसलों को अत्यधिक गर्मी से बचाने और मिट्टी से जल वाष्पीकरण कम करने में मदद कर सकती है।
- Dual Land Productivity: एक ही भूमि से फसल उत्पादन और सौर ऊर्जा प्राप्त होती है।
ध्यान रहे कि सभी फसलों को समान मात्रा में छाया लाभकारी नहीं होती। परिणाम फसल, स्थानीय जलवायु और पैनलों की डिजाइन पर निर्भर करते हैं।
3. भारत में Agri-Voltaics: प्रमुख आँकड़े
| संकेतक | PIB के अनुसार |
| परिचालित परियोजनाएँ (अगस्त 2025) | 36 |
| स्थापित क्षमता | 37.54 MW |
| विकासाधीन पायलट परियोजनाएँ | 10 |
| अनुमानित राष्ट्रीय क्षमता | 3,000–लगभग 14,000 GW |
| GIS Screening में उपयुक्त restricted cropland | 47.35 मिलियन हेक्टेयर |
| उच्च संभावना वाले राज्य | महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश |
Exam Trap: 3,000–14,000 GW एक अनुमानित तकनीकी संभावना है, भारत की वर्तमान स्थापित क्षमता नहीं।
4. भारत के लिए Agri-Voltaics का महत्व
(A) किसानों की आय का विविधीकरण
किसान कृषि उत्पादन के साथ बिजली उत्पादन से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। PIB के अनुसार कुछ परिस्थितियों में प्रति एकड़ वार्षिक आय लगभग ₹60,000 से बढ़कर ₹1 लाख से अधिक हो सकती है। यह सार्वभौमिक या सुनिश्चित आय नहीं है।
(B) भूमि उपयोग दक्षता
पारंपरिक बड़े सौर संयंत्र और कृषि भूमि के बीच भूमि उपयोग का प्रतिस्पर्धी संबंध बन सकता है। AgriPV दोनों गतिविधियों को एक ही भूमि पर जोड़ने का विकल्प प्रस्तुत करता है।
(C) जल संरक्षण और जलवायु अनुकूलन
उपयुक्त फसलों और स्थानीय परिस्थितियों में पैनलों की छाया मिट्टी की नमी बनाए रखने तथा गर्मी के तनाव को कम करने में सहायक हो सकती है।
(D) ऊर्जा सुरक्षा
सौर ऊर्जा का उपयोग सिंचाई पंप और अन्य कृषि गतिविधियों में किया जा सकता है। इससे डीजल या पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने की संभावना बनती है।
5. सरकारी पहलें
| पहल | भूमिका |
| PM-KUSUM | कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा और पंपों के सौरकरण को प्रोत्साहन |
| Centre of Excellence on Agrivoltaics | NISE और ICAR-IARI का अनुसंधान एवं प्रदर्शन सहयोग |
| India Agrivoltaics Alliance | अनुसंधान, नीति संवाद और व्यावहारिक परियोजनाओं को बढ़ावा |
PIB के अनुसार NISE और ICAR-IARI के सहयोग में 100 kW की एक AgriPV पायलट परियोजना भी शामिल है।
महत्वपूर्ण अंतर: PM-KUSUM व्यापक कृषि-सौर ऊर्जा योजना है। इसके प्रत्येक घटक को Agri-Voltaics परियोजना नहीं माना जा सकता।
6. प्रमुख चुनौतियाँ — Mains Analysis
- फसल अनुकूलता: कुछ फसलों में छाया के कारण प्रकाश संश्लेषण और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
- प्रारंभिक निवेश: ऊँचे ढाँचे और कृषि-अनुकूल डिजाइन से परियोजना लागत बढ़ सकती है।
- तकनीकी अनुकूलन: पैनलों की ऊँचाई, दिशा, दूरी और स्थानीय मौसम के अनुसार डिजाइन आवश्यक है।
- किसानों की भागीदारी: बिजली से मिलने वाली आय, भूमि अधिकार और रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए।
- ग्रिड और बाजार: अतिरिक्त बिजली की बिक्री तभी लाभकारी होगी जब उचित कनेक्टिविटी और आर्थिक व्यवस्था उपलब्ध हों।
ये चुनौतियाँ PIB में वर्णित तकनीकी व्यवस्था से निकला विश्लेषण हैं; इन्हें PIB के प्रत्यक्ष निष्कर्ष नहीं समझना चाहिए।
7. आगे की राह (Way Forward)
भारत को क्षेत्रवार फसल-अनुकूल AgriPV डिजाइन विकसित करने, वैज्ञानिक परीक्षण बढ़ाने, छोटे किसानों के लिए उपयुक्त वित्तीय मॉडल तैयार करने और कृषि विश्वविद्यालयों तथा ऊर्जा संस्थानों के सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
Mains Value Addition: Agri-Voltaics की सफलता केवल स्थापित सौर क्षमता से नहीं, बल्कि कृषि उत्पादकता + किसान आय + जल उपयोग + ऊर्जा उत्पादन के संयुक्त प्रदर्शन से मापी जानी चाहिए।
8. UPSC Syllabus Mapping
| परीक्षा | संबंधित विषय |
| Prelims | AgriPV, PM-KUSUM, NISE, ICAR |
| GS-III Agriculture | कृषि उत्पादकता, किसानों की आय |
| GS-III Energy | नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा |
| GS-III Environment | जलवायु अनुकूलन, सतत विकास |
| Essay | कृषि और प्रौद्योगिकी, हरित विकास |
9. Prelims Practice MCQs
Q1. Agri-Voltaics के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसमें एक ही भूमि पर कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन संभव है।
- इसमें सभी प्रकार की फसलों को सौर पैनलों की छाया से समान लाभ होता है।
- इससे किसानों की आय के विविधीकरण की संभावना बन सकती है।
सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1 और 2 (b) केवल 1 और 3 (c) केवल 2 और 3 (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
व्याख्या: कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि छाया का प्रभाव फसल, स्थानीय परिस्थितियों और पैनल डिजाइन पर निर्भर करता है।
Q2. भारत में Agri-Voltaics के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(a) भारत में 14,000 GW की AgriPV क्षमता स्थापित हो चुकी है। (b) AgriPV का उपयोग केवल बिजली उत्पादन के लिए होता है। (c) AgriPV कृषि भूमि के दोहरे उपयोग की संभावना प्रदान करता है। (d) AgriPV का PM-KUSUM से कोई विषयगत संबंध नहीं है।
उत्तर: (c)
व्याख्या: 14,000 GW के आसपास का आँकड़ा अनुमानित संभावना की ऊपरी सीमा है, वर्तमान स्थापित क्षमता नहीं।
10. Mains Practice Questions
Q1. GS-III (150 शब्द, 10 अंक)
भारत में कृषि उत्पादकता और नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के बीच संतुलन स्थापित करने में Agri-Voltaics की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
Answer Framework: परिचय में AgriPV की परिभाषा; मुख्य भाग में भूमि उपयोग, किसान आय, जल संरक्षण, तकनीकी सीमाएँ; निष्कर्ष में वैज्ञानिक और किसान-केंद्रित कार्यान्वयन।
Q2. GS-III (250 शब्द, 15 अंक)
भारत में Agri-Voltaics के विस्तार की संभावनाओं और चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। इसकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक नीतिगत और संस्थागत उपाय सुझाइए।
11. Quick Revision
- AgriPV = Agriculture + Photovoltaics
- World Conference = 7वाँ, नई दिल्ली, 21–23 अक्टूबर 2026
- Theme = Powering the Global South
- Operational Projects = 36 (अगस्त 2025)
- Installed Capacity = 37.54 MW
- Key Scheme = PM-KUSUM
- Research Institutions = NISE + ICAR-IARI
- Rajasthan = उच्च AgriPV संभावना वाले राज्यों में शामिल
Source: PIB (2026-10-23)
सहकारी संघवाद और विधि सुधार (Cooperative Federalism and Law Reforms)
30 second में समझें
एक नज़र में (30-Second Summary)
-
क्या: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में Co-operative Federalism and Law Reforms: National and State Perspectives सम्मेलन का उद्घाटन किया।
-
आयोजक: भारतीय विधि आयोग (Law Commission of India)।
-
स्थान: विज्ञान भवन, नई दिल्ली।
-
मुख्य संदेश: केंद्र और राज्यों के बीच परामर्श, समन्वय तथा साझा उत्तरदायित्व के माध्यम से विधि सुधारों को आगे बढ़ाना।
-
विधायी सुधार: उपराष्ट्रपति ने तीन औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानूनों के प्रतिस्थापन और पिछले 12 वर्षों में 1,700 से अधिक अप्रचलित कानूनों को निरस्त किए जाने का उल्लेख किया।
-
UPSC महत्व: संघवाद, विधि आयोग, संविधान में शक्तियों का वितरण, सुशासन और न्याय तक पहुँच।
स्रोत: PIB, Release ID 2326519, 22 अक्टूबर 2026।
1. चर्चा में क्यों?
22 अक्टूबर 2026 को उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भारतीय विधि आयोग द्वारा आयोजित सहकारी संघवाद एवं विधि सुधार सम्मेलन का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि भारत के संघवाद की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता का सम्मान करते हुए साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों की दिशा में काम करने में निहित है।
उन्होंने राज्यों से अप्रचलित कानूनों की पहचान करने और उन्हें संशोधित अथवा निरस्त करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस सम्मेलन का केंद्रीय विचार था कि सहकारी संघवाद का अर्थ हर विषय पर एकरूपता नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारियों के अनुरूप सहयोग है।
2. सहकारी संघवाद क्या है?
सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) ऐसी व्यवस्था है जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें अपने संवैधानिक अधिकारों को बनाए रखते हुए साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों के लिए सहयोग करती हैं।
भारत में संघीय व्यवस्था के साथ एक मजबूत केंद्र की विशेषताएँ भी मौजूद हैं।
सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद में अंतर
| आधार | सहकारी संघवाद | प्रतिस्पर्धी संघवाद |
|---|---|---|
| मूल विचार | केंद्र-राज्य सहयोग | राज्यों के बीच बेहतर प्रदर्शन की प्रतिस्पर्धा |
| प्रमुख साधन | परामर्श, समन्वय, संयुक्त कार्यक्रम | प्रदर्शन संकेतक, नवाचार, निवेश आकर्षण |
| उद्देश्य | साझा समस्याओं का समाधान | प्रशासनिक दक्षता और विकास |
| संभावित चुनौती | समन्वय में देरी | राज्यों के बीच असमानता बढ़ना |
दोनों अवधारणाएँ एक-दूसरे की विरोधी नहीं हैं। बेहतर शासन व्यवस्था में सहयोग और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा दोनों की भूमिका हो सकती है।
3. भारतीय संविधान में संघवाद का आधार
यह भाग UPSC के लिए जोड़ा गया संवैधानिक संदर्भ है; सम्मेलन की PIB विज्ञप्ति में इन सभी अनुच्छेदों की चर्चा नहीं की गई है।
| संवैधानिक प्रावधान | महत्व |
|---|---|
| अनुच्छेद 1 | भारत राज्यों का संघ है |
| अनुच्छेद 246 | संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों के संदर्भ में विधायी शक्तियों का वितरण |
| सातवीं अनुसूची | संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची |
| अनुच्छेद 249 | राष्ट्रीय हित में राज्य सूची के विषय पर संसद की विधायी शक्ति |
| अनुच्छेद 252 | दो या अधिक राज्यों की सहमति से राज्य विषय पर संसद द्वारा कानून |
| अनुच्छेद 263 | अंतरराज्यीय परिषद की स्थापना का प्रावधान |
| अनुच्छेद 280 | वित्त आयोग |
| अनुच्छेद 279A | GST परिषद |
Prelims Trap: अंतरराज्यीय परिषद का आधार अनुच्छेद 263 है, जबकि GST परिषद का आधार अनुच्छेद 279A है।
4. विधि सुधारों में केंद्र और राज्यों की भूमिका
कानूनों का आधुनिकीकरण केवल संसद के नए कानून बनाने तक सीमित नहीं है। पुराने और अनुपयोगी कानूनों की समीक्षा, राज्यों की प्रशासनिक जरूरतों का आकलन तथा प्रभावी कार्यान्वयन भी आवश्यक हैं।
PIB विज्ञप्ति के अनुसार उपराष्ट्रपति ने निम्नलिखित पर बल दिया:
-
राज्यों के विधि आयोग अप्रचलित कानूनों की पहचान करें।
-
भारतीय विधि आयोग, राज्य विधि आयोगों और विधि विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।
-
राज्यों के बीच अच्छे प्रशासनिक एवं विधायी अनुभव साझा किए जाएँ।
-
संवैधानिक दायरे में राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं का सम्मान किया जाए।
भारतीय विधि आयोग और राज्य विधि आयोग
| विशेषता | भारतीय विधि आयोग | राज्य विधि आयोग |
|---|---|---|
| कार्यक्षेत्र | राष्ट्रीय स्तर पर विधि सुधार संबंधी अध्ययन और सिफारिशें | संबंधित राज्य में विधि सुधार |
| प्रकृति | गैर-संवैधानिक, गैर-सांविधिक सलाहकार निकाय | राज्य के गठन संबंधी आदेश/व्यवस्था पर निर्भर |
| प्रमुख कार्य | कानूनों की समीक्षा, सुधार प्रस्ताव | राज्य कानूनों की समीक्षा, सुधार प्रस्ताव |
| सिफारिशें | सामान्यतः सलाहकारी | सामान्यतः सलाहकारी |
Exam Tip: भारतीय विधि आयोग कोई संवैधानिक संस्था नहीं है। इसकी सिफारिशें अपने-आप कानून नहीं बन जातीं।
5. औपनिवेशिक आपराधिक कानूनों का प्रतिस्थापन
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में तीन औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानूनों के प्रतिस्थापन का उल्लेख किया।
UPSC के लिए संबंधित कानूनों को समझना उपयोगी है:
| पुराने कानून | नए कानून |
|---|---|
| Indian Penal Code, 1860 (IPC) | Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) |
| Code of Criminal Procedure, 1973 (CrPC) | Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) |
| Indian Evidence Act, 1872 | Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 (BSA) |
तीनों नए आपराधिक कानून मुख्यतः 1 जुलाई 2024 से प्रभावी हुए, कुछ प्रावधानों के लिए अपवाद हैं।
महत्वपूर्ण अंतर: PIB में 1,700 से अधिक अप्रचलित कानूनों के निरस्तीकरण का उल्लेख उपराष्ट्रपति के वक्तव्य के रूप में है। इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित समेकित आँकड़ा मानने से पहले संबंधित सरकारी अभिलेखों की जाँच करनी चाहिए।
6. विधि सुधार क्यों आवश्यक हैं?
(A) Ease of Living
अप्रासंगिक या जटिल कानून नागरिकों पर अनावश्यक अनुपालन बोझ डाल सकते हैं। उनकी समीक्षा प्रशासन को अधिक सरल और नागरिक-केंद्रित बना सकती है।
(B) Ease of Doing Business
पुरानी अनुमतियों, दोहराव वाले अनुपालन और अस्पष्ट प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने से व्यापारिक प्रक्रियाओं में सुधार संभव है।
(C) न्याय तक पहुँच
सरल कानून और पारदर्शी प्रक्रियाएँ नागरिकों को अपने अधिकारों तथा दायित्वों को समझने में सहायता कर सकती हैं।
(D) संवैधानिक संतुलन
राज्यों की विशिष्ट सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विधि सुधार करना संघीय व्यवस्था की भावना के अनुरूप है।
7. Critical Analysis — Mains Value Addition
क्या पुराने कानूनों को निरस्त करना ही पर्याप्त है?
नहीं। विधि सुधार की सफलता कानूनों की संख्या घटाने से ही निर्धारित नहीं होती।
इसके लिए यह देखना भी आवश्यक है कि:
-
नागरिकों के अधिकारों का संरक्षण कितना प्रभावी है।
-
न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ कितनी सरल हुई हैं।
-
कानूनों के क्रियान्वयन में कितनी पारदर्शिता है।
-
राज्यों की वैध स्वायत्तता का कितना सम्मान हुआ है।
-
सुधारों से वास्तव में न्याय तक पहुँच और प्रशासनिक दक्षता में सुधार हुआ है या नहीं।
विश्लेषण: केवल विधायी सरलीकरण के बजाय संस्थागत क्षमता, न्यायिक संसाधन, डिजिटल प्रक्रियाओं और नागरिक अधिकारों पर भी समान ध्यान आवश्यक है।
8. प्रमुख चुनौतियाँ
| चुनौती | संभावित प्रभाव |
|---|---|
| केंद्र-राज्य राजनीतिक मतभेद | विधि सुधारों में समन्वय की कमी |
| प्रशासनिक क्षमता में असमानता | राज्यों में सुधारों की गति अलग होना |
| पुराने कानूनों की पहचान | व्यापक विधायी समीक्षा की आवश्यकता |
| राज्यों की विशिष्ट जरूरतें | एक समान समाधान सभी जगह प्रभावी नहीं |
| कानून और कार्यान्वयन में अंतर | अपेक्षित नागरिक लाभ सीमित रहना |
ये UPSC Mains के लिए विश्लेषणात्मक बिंदु हैं, PIB सम्मेलन के औपचारिक निष्कर्ष नहीं।
9. आगे की राह (Way Forward)
-
भारतीय और राज्य विधि आयोगों के बीच नियमित संस्थागत संवाद।
-
अप्रचलित कानूनों की समयबद्ध समीक्षा।
-
कानूनों के प्रभाव का मूल्यांकन।
-
राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रशासनिक अनुभवों का आदान-प्रदान।
-
सुधार प्रक्रिया में विशेषज्ञों, नागरिक समाज और संबंधित हितधारकों की भागीदारी।
-
संघीय सहयोग के साथ राज्यों की संवैधानिक स्वायत्तता का संरक्षण।
10. UPSC Syllabus Mapping
| Paper | संभावित विषय |
|---|---|
| Prelims Polity | संघवाद, सातवीं अनुसूची, विधि आयोग |
| GS-II Constitution | केंद्र-राज्य संबंध, शक्तियों का वितरण |
| GS-II Governance | कानूनों का सरलीकरण, संस्थागत सुधार |
| GS-II Judiciary | न्यायिक और विधायी सुधार |
| GS-IV Ethics | Rule of Law, सार्वजनिक उत्तरदायित्व |
| Essay | सहकारी संघवाद और सुशासन |
11. Prelims Practice MCQs
प्रश्न 1 / 3
भारतीय विधि आयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक संवैधानिक निकाय है। 2. यह विधि सुधारों के संबंध में सरकार को सलाह देता है। 3. इसकी सभी सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी हैं। सही कथन चुनिए।
उत्तर जाँचें
12. Mains Practice Questions
Q1. GS-II (150 शब्द, 10 अंक)
"सहकारी संघवाद का अर्थ सभी राज्यों में एकरूपता नहीं, बल्कि संवैधानिक विविधता का सम्मान करते हुए साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों को प्राप्त करना है।" विवेचना कीजिए।
Answer Framework
-
परिचय: भारतीय संघवाद और संवैधानिक शक्तियों का वितरण।
-
मुख्य भाग: परामर्श, साझा उत्तरदायित्व, राज्यों की स्वायत्तता, विधि सुधारों में समन्वय।
-
चुनौतियाँ: राजनीतिक मतभेद, प्रशासनिक क्षमता में असमानता।
-
निष्कर्ष: सहयोगपूर्ण तथा नागरिक-केंद्रित संघीय शासन।
Q2. GS-II (250 शब्द, 15 अंक)
भारत में अप्रचलित कानूनों को निरस्त करने और विधायी ढाँचे के आधुनिकीकरण की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए। इस प्रक्रिया में भारतीय विधि आयोग तथा राज्य विधि आयोगों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
Q3. GS-II (150 शब्द, 10 अंक)
भारत में सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद किस प्रकार एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
13. Key Terms — Quick Glossary
| Term | आसान अर्थ |
|---|---|
| Cooperative Federalism | केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग आधारित संघवाद |
| Competitive Federalism | राज्यों के बीच बेहतर प्रशासन और विकास की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा |
| Obsolete Law | ऐसा कानून जो बदलती परिस्थितियों में अप्रासंगिक या अनुपयोगी हो गया हो |
| Law Commission | विधि सुधारों पर अध्ययन और सलाह देने वाला निकाय |
| Rule of Law | शासन और नागरिकों का कानून के अधीन होना |
| Legislative Competence | किसी विषय पर कानून बनाने की संवैधानिक शक्ति |
14. Quick Revision — परीक्षा से पहले 1 मिनट
-
सम्मेलन: Co-operative Federalism and Law Reforms: National and State Perspectives
-
आयोजन: भारतीय विधि आयोग
-
उद्घाटन: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन
-
स्थान: विज्ञान भवन, नई दिल्ली
-
मुख्य विचार: केंद्र-राज्य सहयोग के साथ राज्यों की स्वायत्तता का सम्मान
-
विधि आयोग: गैर-संवैधानिक सलाहकार निकाय
-
अनुच्छेद 263: अंतरराज्यीय परिषद
-
अनुच्छेद 279A: GST परिषद
-
Mains Angle: कानूनों का आधुनिकीकरण + नागरिक अधिकार + संस्थागत क्षमता + संघीय संतुलन
Source: PIB (2026-10-22)
वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भारत की भूमिका — NAAS और World Food Prize Foundation Symposium 2026
30 second में समझें
एक नज़र में (30-Second Summary)
-
क्या: National Academy of Agricultural Sciences (NAAS), नई दिल्ली ने अमेरिका में आयोजित 2026 Norman E. Borlaug International Dialogue में भारत की कृषि अनुसंधान उपलब्धियों को प्रस्तुत किया।
-
कब और कहाँ: 20–22 अक्टूबर 2026, डेस मोइनेस (Des Moines), आयोवा, अमेरिका।
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थीम: Before Hunger Wins।
-
महत्वपूर्ण समझौता: NAAS और अमेरिका की Council for Agricultural Science and Technology (CAST) के बीच कृषि अनुसंधान, क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए MoU।
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भारतीय उपलब्धि: Ameena Nazreen A S ने Global Youth Institute (GYI) Award जीता, जिसमें US$500 का नकद पुरस्कार शामिल था।
-
मुख्य मुद्दे: वैश्विक खाद्य सुरक्षा, कृषि उच्च शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, पोषण सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग।
1. चर्चा में क्यों?
भारत की National Academy of Agricultural Sciences (NAAS) ने World Food Prize Foundation के 2026 Norman E. Borlaug International Dialogue में भाग लेकर कृषि अनुसंधान और खाद्य सुरक्षा से जुड़े भारत के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।
इस आयोजन में NAAS और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रमुख प्रकाशनों की प्रदर्शनी, युवा भारतीय विद्यार्थियों की भागीदारी, कृषि उच्च शिक्षा पर विशेष गोलमेज बैठक तथा NAAS-CAST समझौता शामिल था।
इस खबर का UPSC महत्व केवल किसी पुरस्कार या सम्मेलन तक सीमित नहीं है। यह तीन व्यापक विषयों को जोड़ती है:
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खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि प्रणालियाँ।
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कृषि अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा का अंतरराष्ट्रीयकरण।
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युवाओं और वैज्ञानिक संस्थानों की वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भागीदारी।
2. World Food Prize Foundation Symposium 2026 — Key Facts
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| आयोजन | 2026 Norman E. Borlaug International Dialogue |
| संबंधित संस्था | World Food Prize Foundation (WFPF) |
| थीम | Before Hunger Wins |
| तिथियाँ | 20–22 अक्टूबर 2026 |
| स्थान | Des Moines, Iowa, USA |
| भारतीय संस्था | National Academy of Agricultural Sciences (NAAS) |
| प्रमुख सहयोगी भारतीय संस्था | ICAR |
| युवा कार्यक्रम | Global Youth Institute (GYI) |
| अंतरराष्ट्रीय समझौता | NAAS–CAST MoU |
Exam Tip: Norman E. Borlaug International Dialogue, World Food Prize Foundation और Global Youth Institute आपस में संबंधित हैं, लेकिन ये तीनों एक ही चीज़ नहीं हैं।
PIB विज्ञप्ति में GYI Award का उल्लेख है। इसे मुख्य World Food Prize पुरस्कार के बराबर नहीं समझना चाहिए।
3. NAAS क्या है और इसकी भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
National Academy of Agricultural Sciences (NAAS), नई दिल्ली भारत में कृषि विज्ञान से जुड़े वैज्ञानिक संवाद, शोध-आधारित विचार-विमर्श और नीति संबंधी चर्चाओं का एक प्रमुख मंच है।
इस आयोजन में NAAS ने कृषि अनुसंधान से संबंधित प्रकाशन प्रस्तुत किए तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और वैज्ञानिकों के साथ संवाद किया।
NAAS और ICAR की भूमिका में अंतर
| आधार | NAAS | ICAR |
|---|---|---|
| प्रकृति | कृषि वैज्ञानिकों की अकादमी | कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा की राष्ट्रीय प्रणाली का प्रमुख संस्थान |
| प्रमुख भूमिका | वैज्ञानिक संवाद, विशेषज्ञता और नीति संबंधी विचार-विमर्श | कृषि अनुसंधान, शिक्षा और संबंधित संस्थानों का समन्वय |
| इस आयोजन में योगदान | प्रदर्शनी, गोलमेज बैठक, MoU | कृषि अनुसंधान संबंधी प्रकाशन एवं विशेषज्ञ भागीदारी |
यह संस्थागत तुलना परीक्षा के लिए व्याख्यात्मक संदर्भ है। प्रेस विज्ञप्ति का मुख्य फोकस सम्मेलन में NAAS की भागीदारी है।
4. भारत की प्रमुख उपलब्धियाँ
(A) NAAS–CAST समझौता
NAAS और अमेरिका की Council for Agricultural Science and Technology (CAST) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए।
इसका उद्देश्य कृषि अनुसंधान, क्षमता निर्माण, ज्ञान के आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ाना है।
संभावित महत्व: ऐसे संस्थागत सहयोग से शोधकर्ताओं के बीच ज्ञान साझा करने, कृषि शिक्षा में सुधार और वैश्विक चुनौतियों पर संयुक्त अध्ययन के अवसर बढ़ सकते हैं।
हालाँकि, PIB विज्ञप्ति में समझौते की वित्तीय राशि, अवधि या किसी निश्चित संयुक्त परियोजना का विवरण नहीं दिया गया है।
(B) Global Youth Institute में भारतीय विद्यार्थियों की उपलब्धि
NAAS-YUVA चयन प्रक्रिया के माध्यम से भारत के विभिन्न हिस्सों से सात स्कूली विद्यार्थियों ने Global Youth Institute कार्यक्रम में भाग लिया। इन विद्यार्थियों ने खाद्य सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
5. कृषि उच्च शिक्षा में सुधार की आवश्यकता
कार्यक्रम के दौरान कृषि उच्च शिक्षा पर एक विशेष गोलमेज बैठक आयोजित हुई। NAAS के अध्यक्ष, DARE के सचिव तथा ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने कृषि शिक्षा को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया।
उन्होंने विशेष रूप से निम्नलिखित विषयों को रेखांकित किया:
-
जलवायु परिवर्तन
-
प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण
-
जैव विविधता का नुकसान
-
पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन की बढ़ती माँग
-
अकादमिक संस्थानों तथा उद्योग के बीच सहयोग
-
अंतरराष्ट्रीय ज्ञान का आदान-प्रदान
Production-Centric से Integrated Agri-Food Systems तक
यह सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण वैचारिक पहलू था।
| पारंपरिक उत्पादन-केंद्रित दृष्टिकोण | एकीकृत कृषि-खाद्य प्रणाली दृष्टिकोण |
|---|---|
| मुख्य ध्यान कृषि उत्पादन पर | उत्पादन से लेकर खाद्य प्रणाली और मूल्य शृंखला तक |
| फसल उत्पादकता पर जोर | पोषण, संसाधन और बाजार संबंधी चुनौतियों पर भी ध्यान |
| विषय-विशिष्ट अध्ययन | विभिन्न विषयों और संस्थानों के बीच सहयोग |
| अनुसंधान और उद्योग का सीमित जुड़ाव | Academia–Industry Collaboration को प्रोत्साहन |
Mains Value Addition: कृषि क्षेत्र की सफलता का मूल्यांकन केवल अधिक उत्पादन से नहीं, बल्कि पोषण, स्थिरता, किसानों की आजीविका और खाद्य प्रणाली की मजबूती से भी किया जाना चाहिए।
6. खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि — UPSC के लिए विश्लेषण
नीचे का भाग PIB में उठाए गए विषयों पर आधारित अतिरिक्त UPSC विश्लेषण है, सम्मेलन की घोषित सिफारिशों की सूची नहीं।
(A) जलवायु परिवर्तन और कृषि
तापमान में वृद्धि, वर्षा की अनिश्चितता और चरम मौसमी घटनाएँ कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों तथा अनुसंधान को बढ़ावा देना आवश्यक है।
(B) पोषण सुरक्षा
खाद्यान्न की पर्याप्त उपलब्धता और संतुलित पोषण अलग-अलग विषय हैं। कृषि अनुसंधान को पौष्टिक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए।
(C) जैव विविधता संरक्षण
कृषि में जैव विविधता, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फसल प्रणालियाँ तथा प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
(D) Global South में सहयोग
कृषि अनुसंधान और वैज्ञानिक अनुभवों का अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान उन देशों के लिए उपयोगी हो सकता है जहाँ खाद्य सुरक्षा, सीमित संसाधन और जलवायु संबंधी चुनौतियाँ एक साथ मौजूद हैं।
7. प्रमुख चुनौतियाँ
| चुनौती | विश्लेषण |
|---|---|
| Climate Change | उत्पादन की अनिश्चितता और अनुकूलन की आवश्यकता |
| Resource Degradation | मिट्टी, जल और अन्य संसाधनों पर दबाव |
| Research-to-Field Gap | वैज्ञानिक उपलब्धियों को किसानों तक पहुँचाना |
| Skill Development | भविष्य की कृषि चुनौतियों के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन |
| International Collaboration | अनुसंधान सहयोग को ठोस और उपयोगी परिणामों में बदलना |
इन चुनौतियों के समाधान के लिए कृषि अनुसंधान, शिक्षा, उद्योग, किसानों और नीति-निर्माताओं के बीच बेहतर संबंध आवश्यक हैं।
8. आगे की राह (Way Forward)
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कृषि उच्च शिक्षा में जलवायु, पोषण और संसाधन संरक्षण जैसे विषयों को अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करना।
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अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को अनुसंधान और क्षमता निर्माण से जोड़ना।
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युवा विद्यार्थियों को खाद्य सुरक्षा संबंधी शोध के अवसर देना।
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कृषि विश्वविद्यालयों, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच साझेदारी मजबूत करना।
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कृषि अनुसंधान को किसानों की व्यावहारिक समस्याओं और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों से जोड़ना।
9. UPSC Syllabus Mapping
| Paper | संभावित Topic |
|---|---|
| Prelims | NAAS, ICAR, CAST, World Food Prize Foundation |
| GS-III Agriculture | कृषि अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा, कृषि शिक्षा |
| GS-III Environment | जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण |
| GS-II International Relations | अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग |
| GS-II Social Sector | शिक्षा और क्षमता निर्माण |
| Essay | खाद्य सुरक्षा, वैज्ञानिक नवाचार और सतत विकास |
10. Prelims Practice MCQs
1. इसका आयोजन Des Moines, Iowa, USA में हुआ।
2. इसकी थीम 'Before Hunger Wins' थी।
3. NAAS ने इस आयोजन में भाग लिया। सही कथन कौन-से हैं?
उत्तर जाँचें
11. Mains Practice Questions
Q1. GS-III (150 शब्द, 10 अंक)
"भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ अनुसंधान, पोषण और जलवायु अनुकूलन पर भी ध्यान देना आवश्यक है।" विवेचना कीजिए।
Answer Framework
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परिचय: खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि प्रणालियों की आवश्यकता।
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मुख्य भाग: जलवायु परिवर्तन, पोषण, संसाधन संरक्षण, कृषि अनुसंधान।
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समाधान: वैज्ञानिक सहयोग, कृषि उच्च शिक्षा, अनुसंधान का किसानों तक विस्तार।
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निष्कर्ष: उत्पादन-केंद्रित दृष्टिकोण से एकीकृत कृषि-खाद्य प्रणाली की ओर बढ़ना।
Q2. GS-III (250 शब्द, 15 अंक)
भारत की कृषि अनुसंधान और उच्च शिक्षा प्रणाली को वैश्विक खाद्य सुरक्षा की उभरती चुनौतियों के अनुरूप विकसित करने के लिए किन सुधारों की आवश्यकता है? विश्लेषण कीजिए।
Q3. GS-II (150 शब्द, 10 अंक)
वैश्विक दक्षिण के देशों में खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
12. Key Terms — Quick Glossary
| Term | आसान अर्थ |
|---|---|
| Food Security | सभी लोगों के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन तक पहुँच |
| Sustainable Agriculture | प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए दीर्घकालिक कृषि उत्पादन |
| Agri-Food Systems | कृषि उत्पादन से खाद्य प्रसंस्करण, वितरण और उपभोग तक की व्यापक व्यवस्था |
| Agricultural Higher Education | कृषि विज्ञान एवं संबंधित क्षेत्रों की उच्च शिक्षा |
| Capacity Building | कौशल, संस्थागत क्षमता और विशेषज्ञता का विकास |
| Global South | सामान्यतः विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए प्रयुक्त शब्द |
13. Quick Revision — परीक्षा से पहले 1 मिनट
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NAAS: National Academy of Agricultural Sciences, नई दिल्ली।
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सम्मेलन: 2026 Norman E. Borlaug International Dialogue।
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तिथि: 20–22 अक्टूबर 2026।
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स्थान: Des Moines, Iowa, USA।
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थीम: Before Hunger Wins।
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समझौता: NAAS–CAST MoU।
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भारतीय विद्यार्थी: सात प्रतिभागी, NAAS-YUVA चयन प्रक्रिया से।
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GYI Award: Ameena Nazreen A S, US$500 नकद पुरस्कार।
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Mains Angle: उत्पादन-केंद्रित कृषि से टिकाऊ और एकीकृत कृषि-खाद्य प्रणालियों की ओर परिवर्तन।
Mains के लिए
Q2. GS-III (250 शब्द, 15 अंक)
भारत की कृषि अनुसंधान और उच्च शिक्षा प्रणाली को वैश्विक खाद्य सुरक्षा की उभरती चुनौतियों के अनुरूप विकसित करने के लिए किन सुधारों की आवश्यकता है? विश्लेषण कीजिए।
Source: PIB (2026-10-23)
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