UPSC करंट अफेयर्स · 23 अक्टूबर 2026 UPSC CSE GS-II
सहकारी संघवाद और विधि सुधार (Cooperative Federalism and Law Reforms)
30 second में समझें
एक नज़र में (30-Second Summary)
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क्या: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में Co-operative Federalism and Law Reforms: National and State Perspectives सम्मेलन का उद्घाटन किया।
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आयोजक: भारतीय विधि आयोग (Law Commission of India)।
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स्थान: विज्ञान भवन, नई दिल्ली।
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मुख्य संदेश: केंद्र और राज्यों के बीच परामर्श, समन्वय तथा साझा उत्तरदायित्व के माध्यम से विधि सुधारों को आगे बढ़ाना।
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विधायी सुधार: उपराष्ट्रपति ने तीन औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानूनों के प्रतिस्थापन और पिछले 12 वर्षों में 1,700 से अधिक अप्रचलित कानूनों को निरस्त किए जाने का उल्लेख किया।
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UPSC महत्व: संघवाद, विधि आयोग, संविधान में शक्तियों का वितरण, सुशासन और न्याय तक पहुँच।
स्रोत: PIB, Release ID 2326519, 22 अक्टूबर 2026।
1. चर्चा में क्यों?
22 अक्टूबर 2026 को उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भारतीय विधि आयोग द्वारा आयोजित सहकारी संघवाद एवं विधि सुधार सम्मेलन का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि भारत के संघवाद की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता का सम्मान करते हुए साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों की दिशा में काम करने में निहित है।
उन्होंने राज्यों से अप्रचलित कानूनों की पहचान करने और उन्हें संशोधित अथवा निरस्त करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस सम्मेलन का केंद्रीय विचार था कि सहकारी संघवाद का अर्थ हर विषय पर एकरूपता नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारियों के अनुरूप सहयोग है।
2. सहकारी संघवाद क्या है?
सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) ऐसी व्यवस्था है जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें अपने संवैधानिक अधिकारों को बनाए रखते हुए साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों के लिए सहयोग करती हैं।
भारत में संघीय व्यवस्था के साथ एक मजबूत केंद्र की विशेषताएँ भी मौजूद हैं।
सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद में अंतर
| आधार | सहकारी संघवाद | प्रतिस्पर्धी संघवाद |
|---|---|---|
| मूल विचार | केंद्र-राज्य सहयोग | राज्यों के बीच बेहतर प्रदर्शन की प्रतिस्पर्धा |
| प्रमुख साधन | परामर्श, समन्वय, संयुक्त कार्यक्रम | प्रदर्शन संकेतक, नवाचार, निवेश आकर्षण |
| उद्देश्य | साझा समस्याओं का समाधान | प्रशासनिक दक्षता और विकास |
| संभावित चुनौती | समन्वय में देरी | राज्यों के बीच असमानता बढ़ना |
दोनों अवधारणाएँ एक-दूसरे की विरोधी नहीं हैं। बेहतर शासन व्यवस्था में सहयोग और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा दोनों की भूमिका हो सकती है।
3. भारतीय संविधान में संघवाद का आधार
यह भाग UPSC के लिए जोड़ा गया संवैधानिक संदर्भ है; सम्मेलन की PIB विज्ञप्ति में इन सभी अनुच्छेदों की चर्चा नहीं की गई है।
| संवैधानिक प्रावधान | महत्व |
|---|---|
| अनुच्छेद 1 | भारत राज्यों का संघ है |
| अनुच्छेद 246 | संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों के संदर्भ में विधायी शक्तियों का वितरण |
| सातवीं अनुसूची | संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची |
| अनुच्छेद 249 | राष्ट्रीय हित में राज्य सूची के विषय पर संसद की विधायी शक्ति |
| अनुच्छेद 252 | दो या अधिक राज्यों की सहमति से राज्य विषय पर संसद द्वारा कानून |
| अनुच्छेद 263 | अंतरराज्यीय परिषद की स्थापना का प्रावधान |
| अनुच्छेद 280 | वित्त आयोग |
| अनुच्छेद 279A | GST परिषद |
Prelims Trap: अंतरराज्यीय परिषद का आधार अनुच्छेद 263 है, जबकि GST परिषद का आधार अनुच्छेद 279A है।
4. विधि सुधारों में केंद्र और राज्यों की भूमिका
कानूनों का आधुनिकीकरण केवल संसद के नए कानून बनाने तक सीमित नहीं है। पुराने और अनुपयोगी कानूनों की समीक्षा, राज्यों की प्रशासनिक जरूरतों का आकलन तथा प्रभावी कार्यान्वयन भी आवश्यक हैं।
PIB विज्ञप्ति के अनुसार उपराष्ट्रपति ने निम्नलिखित पर बल दिया:
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राज्यों के विधि आयोग अप्रचलित कानूनों की पहचान करें।
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भारतीय विधि आयोग, राज्य विधि आयोगों और विधि विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।
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राज्यों के बीच अच्छे प्रशासनिक एवं विधायी अनुभव साझा किए जाएँ।
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संवैधानिक दायरे में राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं का सम्मान किया जाए।
भारतीय विधि आयोग और राज्य विधि आयोग
| विशेषता | भारतीय विधि आयोग | राज्य विधि आयोग |
|---|---|---|
| कार्यक्षेत्र | राष्ट्रीय स्तर पर विधि सुधार संबंधी अध्ययन और सिफारिशें | संबंधित राज्य में विधि सुधार |
| प्रकृति | गैर-संवैधानिक, गैर-सांविधिक सलाहकार निकाय | राज्य के गठन संबंधी आदेश/व्यवस्था पर निर्भर |
| प्रमुख कार्य | कानूनों की समीक्षा, सुधार प्रस्ताव | राज्य कानूनों की समीक्षा, सुधार प्रस्ताव |
| सिफारिशें | सामान्यतः सलाहकारी | सामान्यतः सलाहकारी |
Exam Tip: भारतीय विधि आयोग कोई संवैधानिक संस्था नहीं है। इसकी सिफारिशें अपने-आप कानून नहीं बन जातीं।
5. औपनिवेशिक आपराधिक कानूनों का प्रतिस्थापन
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में तीन औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानूनों के प्रतिस्थापन का उल्लेख किया।
UPSC के लिए संबंधित कानूनों को समझना उपयोगी है:
| पुराने कानून | नए कानून |
|---|---|
| Indian Penal Code, 1860 (IPC) | Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) |
| Code of Criminal Procedure, 1973 (CrPC) | Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) |
| Indian Evidence Act, 1872 | Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 (BSA) |
तीनों नए आपराधिक कानून मुख्यतः 1 जुलाई 2024 से प्रभावी हुए, कुछ प्रावधानों के लिए अपवाद हैं।
महत्वपूर्ण अंतर: PIB में 1,700 से अधिक अप्रचलित कानूनों के निरस्तीकरण का उल्लेख उपराष्ट्रपति के वक्तव्य के रूप में है। इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित समेकित आँकड़ा मानने से पहले संबंधित सरकारी अभिलेखों की जाँच करनी चाहिए।
6. विधि सुधार क्यों आवश्यक हैं?
(A) Ease of Living
अप्रासंगिक या जटिल कानून नागरिकों पर अनावश्यक अनुपालन बोझ डाल सकते हैं। उनकी समीक्षा प्रशासन को अधिक सरल और नागरिक-केंद्रित बना सकती है।
(B) Ease of Doing Business
पुरानी अनुमतियों, दोहराव वाले अनुपालन और अस्पष्ट प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने से व्यापारिक प्रक्रियाओं में सुधार संभव है।
(C) न्याय तक पहुँच
सरल कानून और पारदर्शी प्रक्रियाएँ नागरिकों को अपने अधिकारों तथा दायित्वों को समझने में सहायता कर सकती हैं।
(D) संवैधानिक संतुलन
राज्यों की विशिष्ट सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विधि सुधार करना संघीय व्यवस्था की भावना के अनुरूप है।
7. Critical Analysis — Mains Value Addition
क्या पुराने कानूनों को निरस्त करना ही पर्याप्त है?
नहीं। विधि सुधार की सफलता कानूनों की संख्या घटाने से ही निर्धारित नहीं होती।
इसके लिए यह देखना भी आवश्यक है कि:
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नागरिकों के अधिकारों का संरक्षण कितना प्रभावी है।
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न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ कितनी सरल हुई हैं।
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कानूनों के क्रियान्वयन में कितनी पारदर्शिता है।
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राज्यों की वैध स्वायत्तता का कितना सम्मान हुआ है।
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सुधारों से वास्तव में न्याय तक पहुँच और प्रशासनिक दक्षता में सुधार हुआ है या नहीं।
विश्लेषण: केवल विधायी सरलीकरण के बजाय संस्थागत क्षमता, न्यायिक संसाधन, डिजिटल प्रक्रियाओं और नागरिक अधिकारों पर भी समान ध्यान आवश्यक है।
8. प्रमुख चुनौतियाँ
| चुनौती | संभावित प्रभाव |
|---|---|
| केंद्र-राज्य राजनीतिक मतभेद | विधि सुधारों में समन्वय की कमी |
| प्रशासनिक क्षमता में असमानता | राज्यों में सुधारों की गति अलग होना |
| पुराने कानूनों की पहचान | व्यापक विधायी समीक्षा की आवश्यकता |
| राज्यों की विशिष्ट जरूरतें | एक समान समाधान सभी जगह प्रभावी नहीं |
| कानून और कार्यान्वयन में अंतर | अपेक्षित नागरिक लाभ सीमित रहना |
ये UPSC Mains के लिए विश्लेषणात्मक बिंदु हैं, PIB सम्मेलन के औपचारिक निष्कर्ष नहीं।
9. आगे की राह (Way Forward)
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भारतीय और राज्य विधि आयोगों के बीच नियमित संस्थागत संवाद।
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अप्रचलित कानूनों की समयबद्ध समीक्षा।
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कानूनों के प्रभाव का मूल्यांकन।
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राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रशासनिक अनुभवों का आदान-प्रदान।
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सुधार प्रक्रिया में विशेषज्ञों, नागरिक समाज और संबंधित हितधारकों की भागीदारी।
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संघीय सहयोग के साथ राज्यों की संवैधानिक स्वायत्तता का संरक्षण।
10. UPSC Syllabus Mapping
| Paper | संभावित विषय |
|---|---|
| Prelims Polity | संघवाद, सातवीं अनुसूची, विधि आयोग |
| GS-II Constitution | केंद्र-राज्य संबंध, शक्तियों का वितरण |
| GS-II Governance | कानूनों का सरलीकरण, संस्थागत सुधार |
| GS-II Judiciary | न्यायिक और विधायी सुधार |
| GS-IV Ethics | Rule of Law, सार्वजनिक उत्तरदायित्व |
| Essay | सहकारी संघवाद और सुशासन |
11. Prelims Practice MCQs
प्रश्न 1 / 3
भारतीय विधि आयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक संवैधानिक निकाय है। 2. यह विधि सुधारों के संबंध में सरकार को सलाह देता है। 3. इसकी सभी सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी हैं। सही कथन चुनिए।
उत्तर जाँचें
12. Mains Practice Questions
Q1. GS-II (150 शब्द, 10 अंक)
"सहकारी संघवाद का अर्थ सभी राज्यों में एकरूपता नहीं, बल्कि संवैधानिक विविधता का सम्मान करते हुए साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों को प्राप्त करना है।" विवेचना कीजिए।
Answer Framework
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परिचय: भारतीय संघवाद और संवैधानिक शक्तियों का वितरण।
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मुख्य भाग: परामर्श, साझा उत्तरदायित्व, राज्यों की स्वायत्तता, विधि सुधारों में समन्वय।
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चुनौतियाँ: राजनीतिक मतभेद, प्रशासनिक क्षमता में असमानता।
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निष्कर्ष: सहयोगपूर्ण तथा नागरिक-केंद्रित संघीय शासन।
Q2. GS-II (250 शब्द, 15 अंक)
भारत में अप्रचलित कानूनों को निरस्त करने और विधायी ढाँचे के आधुनिकीकरण की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए। इस प्रक्रिया में भारतीय विधि आयोग तथा राज्य विधि आयोगों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
Q3. GS-II (150 शब्द, 10 अंक)
भारत में सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद किस प्रकार एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
13. Key Terms — Quick Glossary
| Term | आसान अर्थ |
|---|---|
| Cooperative Federalism | केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग आधारित संघवाद |
| Competitive Federalism | राज्यों के बीच बेहतर प्रशासन और विकास की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा |
| Obsolete Law | ऐसा कानून जो बदलती परिस्थितियों में अप्रासंगिक या अनुपयोगी हो गया हो |
| Law Commission | विधि सुधारों पर अध्ययन और सलाह देने वाला निकाय |
| Rule of Law | शासन और नागरिकों का कानून के अधीन होना |
| Legislative Competence | किसी विषय पर कानून बनाने की संवैधानिक शक्ति |
14. Quick Revision — परीक्षा से पहले 1 मिनट
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सम्मेलन: Co-operative Federalism and Law Reforms: National and State Perspectives
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आयोजन: भारतीय विधि आयोग
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उद्घाटन: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन
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स्थान: विज्ञान भवन, नई दिल्ली
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मुख्य विचार: केंद्र-राज्य सहयोग के साथ राज्यों की स्वायत्तता का सम्मान
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विधि आयोग: गैर-संवैधानिक सलाहकार निकाय
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अनुच्छेद 263: अंतरराज्यीय परिषद
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अनुच्छेद 279A: GST परिषद
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Mains Angle: कानूनों का आधुनिकीकरण + नागरिक अधिकार + संस्थागत क्षमता + संघीय संतुलन
Source: PIB (2026-10-22)
