UPSC करंट अफेयर्स · 23 अक्टूबर 2026 UPSC CSE GS-III
Agri-Voltaics: खेती और सौर ऊर्जा का एकीकरण
30 second में समझें
एक नज़र में (30-Second Summary)
- क्या: Agri-Voltaics या AgriPV में एक ही भूमि पर कृषि उत्पादन और सौर बिजली उत्पादन किया जाता है।
- क्यों चर्चा में: नई दिल्ली में 21–23 अक्टूबर 2026 को 7वाँ Agrivoltaics World Conference आयोजित हुआ, जिसकी थीम Powering the Global South थी।
- भारत की स्थिति: अगस्त 2025 तक 36 परिचालित परियोजनाएँ, कुल 37.54 MW क्षमता और 10 विकासाधीन पायलट परियोजनाएँ।
- संभावना: PIB Backgrounder के अनुसार भारत की अनुमानित AgriPV क्षमता लगभग 3,000 GW से 14,000 GW तक हो सकती है।
- महत्व: भूमि का दोहरा उपयोग, किसानों की अतिरिक्त आय, जल संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा।
स्रोत: PIB Backgrounder, Release ID 2327125, पृष्ठ 1–6।
1. चर्चा में क्यों?
23 अक्टूबर 2026 को PIB ने Agri-Voltaics: Powering India's Farms, Growing a Sustainable Future शीर्षक से एक विस्तृत Backgrounder प्रकाशित किया।
इसमें भारत में कृषि और सौर ऊर्जा को एकीकृत करने की संभावनाओं, परियोजनाओं, सरकारी पहलों और किसानों की आय पर संभावित प्रभावों को रेखांकित किया गया है।
यह विषय UPSC के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कृषि उत्पादकता, भूमि उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु अनुकूलन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था एक साथ जुड़े हैं।
2. Agri-Voltaics क्या है?
Agri-Voltaics ऐसी व्यवस्था है जिसमें सौर पैनलों को खेतों में फसलों के ऊपर या कतारों के बीच स्थापित किया जाता है, ताकि उसी भूमि पर खेती और बिजली उत्पादन दोनों संभव हों।
इसके तीन प्रमुख तकनीकी तत्व हैं:
- Elevated Solar Structures: पैनलों को पर्याप्त ऊँचाई पर लगाया जाता है ताकि नीचे फसलें उग सकें और कृषि उपकरणों की आवाजाही बनी रहे।
- Partial Shading: उपयुक्त परिस्थितियों में आंशिक छाया फसलों को अत्यधिक गर्मी से बचाने और मिट्टी से जल वाष्पीकरण कम करने में मदद कर सकती है।
- Dual Land Productivity: एक ही भूमि से फसल उत्पादन और सौर ऊर्जा प्राप्त होती है।
ध्यान रहे कि सभी फसलों को समान मात्रा में छाया लाभकारी नहीं होती। परिणाम फसल, स्थानीय जलवायु और पैनलों की डिजाइन पर निर्भर करते हैं।
3. भारत में Agri-Voltaics: प्रमुख आँकड़े
| संकेतक | PIB के अनुसार |
| परिचालित परियोजनाएँ (अगस्त 2025) | 36 |
| स्थापित क्षमता | 37.54 MW |
| विकासाधीन पायलट परियोजनाएँ | 10 |
| अनुमानित राष्ट्रीय क्षमता | 3,000–लगभग 14,000 GW |
| GIS Screening में उपयुक्त restricted cropland | 47.35 मिलियन हेक्टेयर |
| उच्च संभावना वाले राज्य | महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश |
Exam Trap: 3,000–14,000 GW एक अनुमानित तकनीकी संभावना है, भारत की वर्तमान स्थापित क्षमता नहीं।
4. भारत के लिए Agri-Voltaics का महत्व
(A) किसानों की आय का विविधीकरण
किसान कृषि उत्पादन के साथ बिजली उत्पादन से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। PIB के अनुसार कुछ परिस्थितियों में प्रति एकड़ वार्षिक आय लगभग ₹60,000 से बढ़कर ₹1 लाख से अधिक हो सकती है। यह सार्वभौमिक या सुनिश्चित आय नहीं है।
(B) भूमि उपयोग दक्षता
पारंपरिक बड़े सौर संयंत्र और कृषि भूमि के बीच भूमि उपयोग का प्रतिस्पर्धी संबंध बन सकता है। AgriPV दोनों गतिविधियों को एक ही भूमि पर जोड़ने का विकल्प प्रस्तुत करता है।
(C) जल संरक्षण और जलवायु अनुकूलन
उपयुक्त फसलों और स्थानीय परिस्थितियों में पैनलों की छाया मिट्टी की नमी बनाए रखने तथा गर्मी के तनाव को कम करने में सहायक हो सकती है।
(D) ऊर्जा सुरक्षा
सौर ऊर्जा का उपयोग सिंचाई पंप और अन्य कृषि गतिविधियों में किया जा सकता है। इससे डीजल या पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने की संभावना बनती है।
5. सरकारी पहलें
| पहल | भूमिका |
| PM-KUSUM | कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा और पंपों के सौरकरण को प्रोत्साहन |
| Centre of Excellence on Agrivoltaics | NISE और ICAR-IARI का अनुसंधान एवं प्रदर्शन सहयोग |
| India Agrivoltaics Alliance | अनुसंधान, नीति संवाद और व्यावहारिक परियोजनाओं को बढ़ावा |
PIB के अनुसार NISE और ICAR-IARI के सहयोग में 100 kW की एक AgriPV पायलट परियोजना भी शामिल है।
महत्वपूर्ण अंतर: PM-KUSUM व्यापक कृषि-सौर ऊर्जा योजना है। इसके प्रत्येक घटक को Agri-Voltaics परियोजना नहीं माना जा सकता।
6. प्रमुख चुनौतियाँ — Mains Analysis
- फसल अनुकूलता: कुछ फसलों में छाया के कारण प्रकाश संश्लेषण और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
- प्रारंभिक निवेश: ऊँचे ढाँचे और कृषि-अनुकूल डिजाइन से परियोजना लागत बढ़ सकती है।
- तकनीकी अनुकूलन: पैनलों की ऊँचाई, दिशा, दूरी और स्थानीय मौसम के अनुसार डिजाइन आवश्यक है।
- किसानों की भागीदारी: बिजली से मिलने वाली आय, भूमि अधिकार और रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए।
- ग्रिड और बाजार: अतिरिक्त बिजली की बिक्री तभी लाभकारी होगी जब उचित कनेक्टिविटी और आर्थिक व्यवस्था उपलब्ध हों।
ये चुनौतियाँ PIB में वर्णित तकनीकी व्यवस्था से निकला विश्लेषण हैं; इन्हें PIB के प्रत्यक्ष निष्कर्ष नहीं समझना चाहिए।
7. आगे की राह (Way Forward)
भारत को क्षेत्रवार फसल-अनुकूल AgriPV डिजाइन विकसित करने, वैज्ञानिक परीक्षण बढ़ाने, छोटे किसानों के लिए उपयुक्त वित्तीय मॉडल तैयार करने और कृषि विश्वविद्यालयों तथा ऊर्जा संस्थानों के सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
Mains Value Addition: Agri-Voltaics की सफलता केवल स्थापित सौर क्षमता से नहीं, बल्कि कृषि उत्पादकता + किसान आय + जल उपयोग + ऊर्जा उत्पादन के संयुक्त प्रदर्शन से मापी जानी चाहिए।
8. UPSC Syllabus Mapping
| परीक्षा | संबंधित विषय |
| Prelims | AgriPV, PM-KUSUM, NISE, ICAR |
| GS-III Agriculture | कृषि उत्पादकता, किसानों की आय |
| GS-III Energy | नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा |
| GS-III Environment | जलवायु अनुकूलन, सतत विकास |
| Essay | कृषि और प्रौद्योगिकी, हरित विकास |
9. Prelims Practice MCQs
Q1. Agri-Voltaics के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसमें एक ही भूमि पर कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन संभव है।
- इसमें सभी प्रकार की फसलों को सौर पैनलों की छाया से समान लाभ होता है।
- इससे किसानों की आय के विविधीकरण की संभावना बन सकती है।
सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1 और 2 (b) केवल 1 और 3 (c) केवल 2 और 3 (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
व्याख्या: कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि छाया का प्रभाव फसल, स्थानीय परिस्थितियों और पैनल डिजाइन पर निर्भर करता है।
Q2. भारत में Agri-Voltaics के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(a) भारत में 14,000 GW की AgriPV क्षमता स्थापित हो चुकी है। (b) AgriPV का उपयोग केवल बिजली उत्पादन के लिए होता है। (c) AgriPV कृषि भूमि के दोहरे उपयोग की संभावना प्रदान करता है। (d) AgriPV का PM-KUSUM से कोई विषयगत संबंध नहीं है।
उत्तर: (c)
व्याख्या: 14,000 GW के आसपास का आँकड़ा अनुमानित संभावना की ऊपरी सीमा है, वर्तमान स्थापित क्षमता नहीं।
10. Mains Practice Questions
Q1. GS-III (150 शब्द, 10 अंक)
भारत में कृषि उत्पादकता और नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के बीच संतुलन स्थापित करने में Agri-Voltaics की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
Answer Framework: परिचय में AgriPV की परिभाषा; मुख्य भाग में भूमि उपयोग, किसान आय, जल संरक्षण, तकनीकी सीमाएँ; निष्कर्ष में वैज्ञानिक और किसान-केंद्रित कार्यान्वयन।
Q2. GS-III (250 शब्द, 15 अंक)
भारत में Agri-Voltaics के विस्तार की संभावनाओं और चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। इसकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक नीतिगत और संस्थागत उपाय सुझाइए।
11. Quick Revision
- AgriPV = Agriculture + Photovoltaics
- World Conference = 7वाँ, नई दिल्ली, 21–23 अक्टूबर 2026
- Theme = Powering the Global South
- Operational Projects = 36 (अगस्त 2025)
- Installed Capacity = 37.54 MW
- Key Scheme = PM-KUSUM
- Research Institutions = NISE + ICAR-IARI
- Rajasthan = उच्च AgriPV संभावना वाले राज्यों में शामिल
Source: PIB (2026-10-23)
